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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 2
वैशाखे निरुपहते वृक्षे नीडः सुभिक्षशिवदाता । निन्दितकण्टकिशुष्केष्वसुभिक्षभयानि तद्देशे ॥
यदि कौआ बैशाख मास में उपद्रवरहित वृक्ष के ऊपर पोंसला बनावे तो सुभिक्ष और मंगल करने वाला होता है तथा निन्दित, काँटेदार या सूखे हुये वृक्ष पर पोंसला बनावे तो उस देश में दुर्भिक्ष का भय होता है।
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