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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 19
ऐन्द्रयादिदिगवलोकी सूर्याभिमुखो रुवन् गृहे गृहिणः । राजभयचोरवन्धनकलहाः स्युः पशुभयं चेति ॥
यदि कौआ गृहस्थों के घर पर स्थित होकर पूर्व आदि दीप्त दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो क्रम से राजभय, चोरभय, बन्धन और कलह होता है। जैसे दीप्त पूर्व दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो राजभय, दीप्त दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो चोरभय, दीप्त पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो बन्धन और दीप्त उत्तर दिशा की तरफ मुख करके शब्द करे तो कलह होता है। साथ ही दीप्त विदिशाओं की तरफ मुख करके शब्द करे तो पशुओं को भय होता है।
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