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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 15
चं‌द्रव्यमुपनयेत्तस्य लब्धिरपहरति चेत् प्रणाशः स्यात् । पीतद्रव्यैः कनकं वस्रं कार्यासिकैः सितै रूप्यम् ॥
कौआा जो कहीं से उठा कर ले आवे, उसका लाभ और जो से जाय उसका नारा होता है। पोले द्रव्य से सोना, कपाससम्बन्धी बस्तु से यत्र और सफेद वस्तु से रजत का लाभ या नाश होता है ।
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