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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 12
भस्मास्थिकेशपत्राणि विन्यसन् पतिवधाय शय्यायाम् । मणिकुसुमाद्यवहनने सुतस्य जन्माप्यथाङ्गनायाश्च ॥
यदि कौवे शय्या के ऊपर भस्म, हट्टी, केश और पत्ते डालें तो शय्या के स्वामी का वर्ष, मणि, फूल और फल डालें तो पुत्रजन्म तथा तृण, काठ आदि डालें तो कन्या का जन्म होता है।
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