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बृहत्संहिता • अध्याय 95 • श्लोक 11
ऊर्ध्वमुखाश्चलपक्षाः पथि भयदाः क्षुद्धयाय धान्यमुषः । सेनाङ्गस्था युद्धं परिमोषं चान्यभृतपक्षाः ॥
यदि कौवे ऊपर को मुँह उठाकर पंखों को चलावें तो मार्ग में भय, धान्यों को चुरावें तो दुर्भिक्ष का भय, सेना के अंगों पर बैठ जाय तो युद्ध और कोयल के समान अति काले पंख कौवे के हों तो चोर का भय होता है।
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