यदि कौये अाश में प्रदक्षिणक्रम से भ्रमण करें तो आत्मीय जनों से और अपसव्य क्रम से भ्रमण करें तो शत्रुओं से भय होता है तथा अति आकुलता के साथ भ्रमण करें तो देखने वाले की अनवस्थिति होती है।
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