यदि दक्षिण भाग का दाँत मूल से टूट जाय तो राजा को भागने का भय, मध्य से टूट जाय तो देश को भागने का भय और अग्र भाग से टूट जाय तो सेना को भागने का भय रहता है। यदि वाम भाग का दाँत मूल आदि से टूट जाय तो क्रम से राजपुत्र, पुरोहित, साधनपति तथा सेना, खी और प्रधान पुरुष को मारता है।
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