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बृहत्संहिता • अध्याय 94 • श्लोक 5
कृकलासकपिभुजङ्गेष्वसुभिक्षव्याधयो रिपुवशित्वम् । गृध्रोलूकध्वांक्षश्येनाकारेषु जनमरकः ॥
गिरगिट, छिपकली, वानर या सर्प की तरह चिह्न हो तो दुर्भिक्ष, व्याधि और शत्रु के अधिकार में रहना होता है तथा गिद्ध, उल्लू, काक या बाज के समान चिह्न हो तो मरकी होती है।
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