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बृहत्संहिता • अध्याय 94 • श्लोक 11
क्षीरमृष्टफलपुष्पपादपेष्वापगातटविघट्टितेन वा। वाममध्यरदभङ्गखण्डने शत्रुनाशकृदतोऽन्यथा परम् ॥
यदि वाम भाग का दाँत दूध वाले, मधुर फल वाले या फूल वाले वृक्षों के घर्षण या नदी के तट को विघट्टित करने पर मध्य से टूट जाय तो शत्रुनाश करता है। इसके विपरीत ( दुष्ट वृक्षों के घर्षण से वाम दन्त का अग्र या मूल टूट जाय) तो शत्रु की वृद्धि करता है।
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