पूर्णपात्रदधिविप्रदेवतागन्यपुष्पफर काञ्चनादि वा । द्रव्यमिष्टमथवा परं भवेद्वेषतां यदि समीपतो जयः ॥
यदि शब्द करते हुये घोड़े के पास में किसी शुभ द्रव्य से पूर्ण पात्र, दही, ब्राह्मण, देवता, सुगन्धित द्रव्य, फूल, फल, सोना आदि (रजत, मणि, मोतो आदि) या अन्य शुभ द्रव्य आ जायें तो जय होती है।
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