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बृहत्संहिता • अध्याय 93 • श्लोक 7
क्रौञ्श्चवद्रिपुवधाय हेषितं ग्रीवया त्वचलया च सोन्मुखम् । स्निग्धमुच्चमनुनादि हृष्टवद्मासरुद्धवदनैश्च वाजिभिः ॥
घोड़े का क्रौञ्चपक्षी की तरह शब्द करना तथा गर्दन को स्थिर और ऊपर मुख करके शब्द करना, उच्च स्वर से बार-बार मधुर शब्द करना या ग्रास से मुख बन्द रहने पर भी आनन्दपूर्वक शब्द करना शत्रु के वध के लिये होता है।
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