मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 93 • श्लोक 6
आरोहणमन्यवाजिनां पर्याणादियुतस्य वाजिनः । उपवाह्यतुरङ्गमस्य वा कल्पस्यैव विपन्नशोभना ॥
पर्याण (तंग तरहा, पुरुष आदि) से युत घोड़े के ऊपर दूसरे घोड़े का चढ़ना, नौरोंग और उपवाह्य ( सवार को पीठ पर लेकर चलते-चलते कुछ नहीं खाने वाले) घोड़े का विपत्ति में आना शुभ नहीं होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें