आरोहणमन्यवाजिनां पर्याणादियुतस्य वाजिनः । उपवाह्यतुरङ्गमस्य वा कल्पस्यैव विपन्नशोभना ॥
पर्याण (तंग तरहा, पुरुष आदि) से युत घोड़े के ऊपर दूसरे घोड़े का चढ़ना, नौरोंग और उपवाह्य ( सवार को पीठ पर लेकर चलते-चलते कुछ नहीं खाने वाले) घोड़े का विपत्ति में आना शुभ नहीं होता है।
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