रात्रि के समय घोड़े के नासारन्ध्र, प्रोथ (नासामध्य भाग), शिर, अनुपात (गण्डाघो भाग) और नेत्र प्रदीप्त हों तो जय के लिये होता है। पलाश के समान लोहित, कृष्ण, शुक्ल-कृष्ण, कपोत के समान, तोते के समान या सफेद वर्ण वाले घोड़े के एक, दो या अनेक अंगों में सदा ज्वलन हो तो शुभ होता है।
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