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बृहत्संहिता • अध्याय 93 • श्लोक 11
अतीव हेषन्ति किरन्ति वालान् निद्रारताश्च प्रवदन्ति यात्राम् । रोमत्यजो दीनखरस्वराश्च पांशून् प्रसन्तश्च भयाय दृष्टाः ॥
यदि घोड़े बहुत शब्द करें, पूंछ के बालों को इधर-उधर फैलावें या शयन करें तो यात्रा को सूचित करते हैं तथा यदि बालों को गिरावें, दीन गदहे की तरह शब्द करें या धूली-भक्षण करें तो भय के लिये देखे जाते हैं।
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