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बृहत्संहिता • अध्याय 93 • श्लोक 10
वामैश्च पादैरभिताडयन्तो महीं प्रवासाय भवन्ति भर्तुः । सन्ध्यासु दीप्तामवलोकयन्तो द्वेषन्ति चेद् बन्यपराजयाय ॥
बाँयें पैर से पृथ्वी को खोदने वाले घोड़े स्वामी के विदेश गमन के कारण होते हैं तथा सन्ध्याओं (सूर्योदय, मध्याह्न, सूर्यास्त और अर्थ रात्रि) में दीप्त दिशा को देखते हुये शब्द करें तो स्वामी के बन्धन और पराजय के कारण होते हैं।
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