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बृहत्संहिता • अध्याय 90 • श्लोक 2
पूर्णः स्वभावप्रभवः स तस्याः । येऽन्ये स्वरास्ते प्रकृतेरपेताः सर्वे च दीप्ता इति सम्प्रदिष्टाः ॥
लोमाशिका के स्वभाव से ही उत्पन्न होने वाले 'कक्कू शब्द पूर्ण हैं, इनसे अन्य स्वर स्वभाव-विरुद्ध और दीप्त है।
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