उच्चैर्घोरं वर्णमुच्चार्य पूर्व पश्चात् क्रोशेत् क्रोष्टुकस्यानुरूपम् । या सा क्षेमं प्राह वित्तस्य चाप्तिं संयोगं वा प्रोषितेन प्रियेण ॥
जो शिवा बहुत जोर से पहले क्रूर वर्ण का उच्चारण करके बाद में शृगाल की तरह शब्द करे वह क्षेम, धन का लाभ और प्रिय-सपागम को सूचित करती है।
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