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बृहत्संहिता • अध्याय 90 • श्लोक 14
शान्ता त्ववर्णात् परमारुवन्ती टाटामुदीर्णामिति वाश्यमाना । टेटे च पूर्व परतश्च थेथे तस्याः स्वतुष्टिप्रभवं रुतं तत् ॥
जो शिवा शान्त दिशा में स्थित होकर पहले अकार का उच्चारण करके बाद में 'आ' आदि वर्णों का उच्चारण करे या 'टाटा' शब्द करे या पहले 'टेटे' शब्द करके फिर 'धेधे' शब्द करे तो ये सभी प्रसत्रतापूर्वक उसके शब्द होते हैं और सभी शुभ फल प्रदान करने वाले होते हैं।
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