इसके बाद आठ बार आदि शब्द अग्राह्य हैं। दक्षिण दिशा में छठे और पाँचवें फल को छोड़ कर शेष समस्त फलों को उलटा समझना चाहिये। जैसे एक बार शब्द करे तो क्षोभ, दो बार अनिष्ट-श्रवण, तीन बार करे तो धनहानि, चार बार करे तो प्रिय-वियोग, पाँच बार करे तो क्षोभ, छ: बार करे तो प्रधानों में भेद और सात बार करे तो सम्पत्ति की हानि होती है।
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