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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 7
ज्यौतिषं आगमशास्त्रं विप्रतिपत्तौ न योग्यमस्माकम् । स्वयमेवा विकल्पयितुं किन्तु बहूनां मतं वक्ष्ये ॥
ज्योतिष सह खगोल विज्ञान का विज्ञान महान संतों के अंतर्ज्ञान पर आधारित था। यदि उनके विचारों में कोई मतभेद हो तो हमारी ओर से सही रास्ता सुझाना उचित नहीं होगा। इसलिए मैं केवल विभिन्न राय उद्धृत कर सकता हूं।
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