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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 44
शिखिभयमनलाभे शस्त्रकोपश्च रक्ते कनकनिकषगौरे व्याधयो दैत्यपूज्ये । हरितकपिलरूपे श्वासकासप्रकोपः पतति न सलिलं खाद् भस्मरूक्षासिताभे ॥
शुक्र अग्नि के रंग का हो तो अग्नि से खतरा रहता है; यदि लाल हो तो युद्ध होगा; यदि सुनहरा हो, तो बीमारियाँ फूटेंगी; यदि हरा या मटमैला है, तो अस्थमा और खांसी प्रबल होगी; और यदि वह राखयुक्त, खुरदरा या काला दिखाई दे, तो पानी की एक बूंद भी नहीं गिरेगी।
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