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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 32
मैत्रे क्षत्रविरोधो ज्येष्ठायां क्षत्रमुख्यसन्तापः । मौलिकभिषजाम् मूले त्रिष्वपि चैतेष्वनावृष्टिः ॥
शुक्र अनुराधा में हो तो क्षत्रियों में फूट होगी। जब वह ज्येष्ठ में होगा तो क्षत्रिय सरदारों को कष्ट होगा। शुक्र मूल में होने से औषधि एवं वैद्य चिंतित रहेंगे। इन तीनों में से किसी एक में बारिश होगी.
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