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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 31
स्वातौ प्रभूतवृष्टिः दूतवणिग्नाविकान् स्पृशत्यनयः । एन्द्राग्नेऽपि सुवृष्टिः वणिजां च भयं विजानीयात् ॥
जब शुक्र स्वाति में होगा तो प्रचुर वर्षा होगी। दूतों, व्यापारियों और नाविकों को कष्ट होगा। शुक्र विशाख में होने से व्यापारियों में भय रहेगा।
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