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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 22
अपरस्यां स्वात्याद्यं ज्येष्ठाद्यं चापि मण्डलं शुभदम् । पित्र्याद्यं पूर्वस्यां शेषाणि यथोक्तफलदानि ॥
शुक्र पश्चिम में चौथे और पांचवें मंडल से गुजरते हुए लोगों को लाभ प्रदान करेगा। जब वह पूर्व दिशा में तृतीय खंड में गोचर करेगा तो भी ऐसा ही परिणाम होगा। अन्य मंडलों पर उनके गोचर का प्रभाव वैसा ही होगा जैसा पहले ही बताया जा चुका है।
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