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बृहत्संहिता • अध्याय 9 • श्लोक 1
नागगजैरावतवृषभगोजरद्गवमृगाजदहनाख्याः । अश्विन्याद्याः कैश्चित् त्रिभाः क्रमाद् वीथयः कथिताः ॥
यह कहा गया है (देवल और अन्य द्वारा) कि नौ मार्ग हैं:- (1) नाग (2) गज (3) ऐरावत (4) वृषभ (5) गो (6) जरद्गव (7) मृग (8) अज और (9) दहन। क्रमशः अश्विनी से गिने गए और शुक्र से संबंधित नौ तारों के त्रिगुणों से बना है।
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