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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 9
द्वारे शिरो न्यस्य वहिः शरीरं रोरूयते श्वा गृहिणीं विलोक्य । रोगप्रदः स्यादथ मन्दिरान्तर्बहिर्मुखो वक्ति च बन्धकीं ताम् ॥
यदि कुत्ता द्वार पर शिर और बाहर शरीर को रखकर गृहस्वामी की गृहिणी को देखकर बार-बार रुदन करे तो उस गृहिणी को वेश्या कहता है।
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