मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 7
उच्चैः स्वराः स्युस्तृणकूटसंस्थाः प्रासादवेश्मोत्तमसंस्थिता वा । वर्षासु वृष्टिं कथयन्ति तीव्रामन्यत्र मृत्युं दहनं रुजश्च ॥
यदि वर्षाकाल में तृण से बने हुये गृह, प्रासाद या उत्तम गृह में स्थित होकर कुत्ता ऊँचे स्वर से शब्द करे तो अत्यधिक वृष्टि को सूचित करता है तथा अन्य ऋतु में पूर्वोक्त स्थान में स्थित होकर शब्द करे तो मृत्यु, अग्निभय और रोगभय को सूचित करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें