यदि वर्षाकाल में तृण से बने हुये गृह, प्रासाद या उत्तम गृह में स्थित होकर कुत्ता ऊँचे स्वर से शब्द करे तो अत्यधिक वृष्टि को सूचित करता है तथा अन्य ऋतु में पूर्वोक्त स्थान में स्थित होकर शब्द करे तो मृत्यु, अग्निभय और रोगभय को सूचित करता है।
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