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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 6
उदङ्‌मुखश्चापि निशार्धकाले विप्रव्यथां गोहरणं च शास्ति । निशावसाने शिवदिङ्मुखश्च कन्याभिदूषानलगर्भपातान् ॥
यदि आधी रात में उत्तर की तरफ मुँह करके कुत्ता रुदन करे तो ब्राह्मणों को पीड़ा और गायों की चोरी होने को सूचित करता है। यदि रात्रि के अन्त में ईशान कोण की तरफ मुख करके कुत्ता रुदन करे तो कुमारी को दूषित, अग्नि का भय और स्त्रियों का गर्भपात कराता है।
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