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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 20
वृक्षोपगे क्रोशति तोयपातः स्यादिन्द्रकीले सचिवस्य पीडा। बायोगृह सस्यभयं गृहान्तः पीडा पुरस्यैव च गोपुरस्थे ॥
यदि वृक्ष के समीप में कुत्ता शब्द को तो वर्ण होती है, इन्द्रकील के समीप में शब्द को तो मन्त्री को पीड़ा, गृह के मध्यान्य कोण में स्थित होकर शब्द करे तो पाना को भष और पुरद्वार में स्थित होकर शब्द करे तो पुर को पीड़ा होती है।
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