यदि कुत्ता मुख से जूते को ग्रहण करके गमन करने वाले के समीप आ जाय तो कार्य की सिद्धि, मांस लेकर आ जाय तो धन की प्राप्ति, आर्द्र हड्डी लेकर आ जाय तो शुभ-प्राप्ति, जला हुआ काष्ठ या सूखा मांस लेकर आ जाय तो गमन करने वाले की मृत्यु और अग्निरहित उल्मुक (जला हुआ काष्ठ) लेकर आ जाय तो उपद्रव होता है। यदि मनुष्य के शिर, हाथ, पाँव आदि कोई अवयव मुख में लेकर आ जाय तो भूमि क
प्राप्ति तथा वत्र, बल्कल आदि लेकर आ जाय तो मृत्यु होती है। कोई-कोई वखसहित कुत्ते को आगे आने में शुभ फल कहते हैं। यदि सूखी हुई हड्डी लेकर कुत्ता घर में प्रवेश करे तो गृहपति की मृत्यु होती है। यदि जझीर, पुरानी लता, चमड़े की रस्सी आदि लेकर आगे आ जाय तो गमन करने वाले को नन्धन होता है। यदि गमन करने वाले के पाँव चाटे या अपने कान को पटपटाते हुये गमन करने वाले के ऊपर चढ़ने की इच्छा करे तो यात्रा में विघ्न होता है। यदि गमन करने वाले के मार्ग का विरोध करे या अपने अङ्ग को खुजलाये तो मार्ग में विरोध होता है। यदि गमन करने वाले या एक जगह पर स्थित मनुष्य के आगे में ऊपर पाँव करके सो जाय तो सदा दोषकारी होता है।
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