ग्रामस्य मध्ये यदि या पुरस्य भषन्ति संहत्य मुहुर्मुहुचे। ते क्लेशमाख्यान्ति रुष्ट्रीश्वरस्य श्रारण्यसंस्थो मृगवद्विचिन्यः ॥
गाँव या पुर के मध्य में। कुत्ते मिल कर बार-बार शब्द करें तो वे गाँव के स्वामी को क्लेश की सूचना देते हैं। वन में स्थित कुत्ते के फलों का विचार मृग की तरह करना चाहिये, अर्थात् 'ओजाः प्रदक्षिणं शस्ता मृगाः सनकुलाण्डजा:' इत्यादिवत् विचार करना चाहिये ।
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