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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 18
प्रकाश्य दन्तान् यदि लेढि पृष्टमुशन्ति तदाशनं यदाननं लेडि पुनर्न प्रवृत्तभोज्येऽपि सृक्विणी तद्विदः । सृक्विणी तदान्नविघ्नकृत् ॥
यदि कुत्ता दाँतों को बाहर निकाल कर ओठ के अन्त भाग को चाटे तो कुत्ते की चेष्टाओं को जानने वाले मिष्टात्र का लाभ कहते हैं तथा मुँह को जब चाटता हो, उस समय यदि ओठ के अन्त भाग को नहीं चाटता हो तो भोजन के लिए तैयार पुरुष के अत्र में विघ्न डालता है।
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