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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 15
ग्रामे भषित्वा च बहिः श्मशाने भवन्ति चेदुत्तमपुंविनाशः । वियासतश्चाभिमुखो विरौति यदा तदा श्वा निरुणद्धि यात्राम् ॥
पहले कुत्ता गाँव में शब्द करके बाद में श्मशान में जाकर शब्द करे तो प्रधान पुरुष का नाश होता है। यदि गमन करने वाले के सम्मुख आकर कुत्ता रुदन करे तो यात्रा को रोकता है।
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