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बृहत्संहिता • अध्याय 89 • श्लोक 12
वामं जिग्रेज्जानु वित्तागमाय स्त्रीभिः साकं विग्रहो दक्षिणञ्चेत् । ऊरूं वामं चेन्द्रियार्थोपभोगः सव्यं जिनेदिष्टमित्रैर्विरोधः ॥
यदि कुत्ता बाँई जांप को सूपे तो धनलाभ, दाहिनी जाँघ को सूधे तो खियों के साथ कलह, बाई करु को सूपे तो बुद्धीन्द्रियों के विषयों का उपभोग और दाहिनी ऊरु सेनेोतियों में यिोग होता है।
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