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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 47
दिङ्मण्डलेऽ भ्यन्तरबाह्यभागे फलानि विन्द्याद् गृहगोधिकायाः । छुच्छुन्दरी चिच्चिडिति प्रदीप्ता पूर्णा तु सा तित्तिडिति स्वनेन ॥
बत्तीस से विभक्त दिक्चक्र के नाभि स्थान और नाभि से बाहर भाग में स्थित छिपकली ( गिरगिट) का फल होता है। छछुन्दर को 'चिच्चिड़' शब्द से प्रदीप्त और 'तित्तिङ' शब्द से पूर्ण जानना चाहिये।
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