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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 42
विद्धि भद्रे मया यत् त्वमिममर्थ कल्याणि सर्ववचसां वेदित्री त्वं प्रचोदिता । प्रकीर्यसे ॥
हे भद्रे ! मैं जो इस अर्थ को पूछने के लिये आरम्भ कर रहा हूँ, उसको तुम जानती हो। हे कल्याणि! तुम सब वाक्यों को जानने वाली कहीं धोती हो।
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