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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 35
नानाविधानि विरुतानि हि छिप्पिकाया- स्तस्याः शुभाः कुलुकुलुर्न शुभास्तु शेषाः । यातुर्बिडालविरुतं न शुभं सदैव गोस्तु क्षुतं मरणमेव करोति यातुः ॥
छिपिका के अनेक प्रकार के शब्द होते हैं, उनमें 'कुलुकुलु' शब्द शुभ नहीं होते, शेष सभी शब्द शुभ होते हैं। मार्जार का शब्द गमन करने वाले के लिये अशुभ होता है तथा गो जाति को छोंक यात्रा करने वाले को मृत्यु को सूचित करती है।
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