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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 27
श्रीकर्णरुतं तु दक्षिणे क्वक्वक्वेति शुभं प्रकीर्तितम् । मध्यं खलु चिक्विकीति यच्छेषं सर्वमुशन्ति निष्फलम् ॥
यदि श्रीकणं पक्षी दक्षिण भाग में स्थित होकर 'क्वक्वक्व' शब्द करे तो शुभ होता है, लेकिन उसी का 'चि‌चिकू' शब्द मध्यम और शेष सभी प्रकार के शब्द निष्फल होते हैं।
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