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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 26
अण्डीरकष्टीति रुतेन पूर्णष्टिट्टिट्टिशब्देन तु दीप्त उक्तः । फेण्टः शुभो दक्षिणभागसंस्थो न वाशिते तस्य कृतो विशेषः ॥
अण्डीरक 'टी' शब्द से पूर्ण और 'रिट्टिट्टि' शब्द से दीप्त होता है। यदि फेण्ट पक्षी गमन करने वाले के दक्षिण भाग में स्थित हो तो शुभ होता है, इसके शब्द में और कोई विशेषता नहीं कही गई है।
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