किलिकिलिविरुतं कपेः प्रदीप्तं न शुभफलप्रदमुद्दिशन्ति यातुः । शुभमपि कथयन्ति चुग्लुशब्दं कपिसदृशं च कुलालकुक्कुटस्य ॥
वानर का किलिकिलि शब्द प्रदीप्त और गमन करने वाले के लिये शुभप्रद नहीं होता है, परन्तु चुग्तु शब्द शुभप्रद होता है तथा कुलालकुक्कुट का शब्द वानर के समान शुभाशुभ फल देने वाला होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।