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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 22
किलिकिलिविरुतं कपेः प्रदीप्तं न शुभफलप्रदमुद्दिशन्ति यातुः । शुभमपि कथयन्ति चुग्लुशब्दं कपिसदृशं च कुलालकुक्कुटस्य ॥
वानर का किलिकिलि शब्द प्रदीप्त और गमन करने वाले के लिये शुभप्रद नहीं होता है, परन्तु चुग्तु शब्द शुभप्रद होता है तथा कुलालकुक्कुट का शब्द वानर के समान शुभाशुभ फल देने वाला होता है।
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