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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 21
किलिकिल्किलि तित्तिरस्वनः शान्तः शस्तफलोऽन्यथापरः । शशको निशि वामपार्श्वगो वाशन् शस्तफलो निगद्यते ॥
तित्तिर पक्षी का किलिकिल्किलि शब्द शान्त तथा शुभ करने वाला और उससे भिन्न शब्द अशुभ करने वाला होता है। यदि खरहा रात्रि में वाम भाग में होकर शब्द करे तो शुभ फल होता है।
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