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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 2
लोमाशिका पिङ्गलछिप्पिकाख्यौ वल्गुल्युलूकौ शशकच रात्रौ । सर्वे स्वकालोत्क्रमचारिणः स्युर्देशस्य नाशाय नृपान्तदा वा ॥
लोमड़ी, उलूकचेटी, छिप्पिका पक्षी, बागल, उल्लू, खरहा- ये सभी जन्तु रात्रिचर होते हैं। ये सभी जन्तु अपने काल का अतिक्रमण कर भ्रमण करें (रात्रिचर दिन में और दिनचर रात्रि में भ्रमण करें) तो देश का नारा और राजा की मृत्यु को सूचित करने बाले होते हैं।
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