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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 17
कोटुक्लीति क्षेभ्यः स्वरः कटुक्लीति वृष्टये तस्याः । अफलः कोटिकिलॉति च दीप्तः खलु गुं कृतः शब्दः ॥
उस करायिका का कोक्ति शब्द क्षेम करने जाता, कटुक्ति शब्द हि करने वाला, कोटिनिर्मल शब्द निष्फल और गुं शब्द दीप्त होता है।
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