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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 14
चिचिदिति शब्दः पूर्णः श्यामायाः शूलिशूलिति च धन्यः । चच्चेति च दीप्तः स्यात् स्वप्रियलाभाय चिक्चिगिति ॥
श्यामा पक्षी का चिचित् शब्द पूर्ण, शूलिशूल शब्द शुभ, चन्व शब्द दीप्त और चिचिक् शब्द मित्रलाभ के लिये होता है।
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