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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 12
यानासनशय्यानिलयनं कपोतस्य सद्यविशनं वा। अशुभप्रदं नराणां जातिविभेदेन कालोऽन्यः ॥
कबूतर का पाहन, आसन और शय्या पर बैठना तथा घर में प्रवेश करना मनुष्यों के लिये अशुभकारी है। जाति के भेद से फल के समय भी भित्र-भिन्न होते हैं।
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