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बृहत्संहिता • अध्याय 88 • श्लोक 11
वञ्चलकरुतं तित्तिडिति दीप्तमथ किल्किलीति तत्पूर्णम् । श्येनशुकगृध्रकङ्काः प्रकृतेरन्यस्वरा दीप्ताः ॥
बहुल का दीप्त शब्द तितिड़ और पूर्ण शब्द किल्किली है। बाज, तोता, गिद्ध और कङ्क के स्वभाव से विपरीत होने पर दीप्त शब्द होता है।
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