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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 7
ऊर्ध्व सिद्धिः कैवर्तसङ्गमो मीनतित्तिराद्याप्तिः । प्रब्रजितदर्शनं तत्परे च पक्वान्नफललब्धिः ॥
तृतीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो कार्यों की सिद्धि, कैवर्च का संयोग तथा मजली और शीतर की प्राप्ति होती है। चतर्थ भाग में स्थित शकन कोलाहल करे
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