मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 6
यात्रासिद्धिः समदक्षिणेन शिखिमहिषकुक्कुटाप्तिश्च । याम्याद् द्वितीयभागे चारणसङ्गः शुभं प्रीतिः ॥
दक्षिण भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो यात्रा की सिद्धि तथा मयूर, भैंस और मुर्गे को प्राप्ति होती है। दक्षिण भाग से द्वितीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो चारण (नट-नर्तक) के साथ संयोग तथा शुभ कार्य और धर्मादि की प्राप्ति को सूचित करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें