दक्षिण भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो यात्रा की सिद्धि तथा मयूर, भैंस और मुर्गे को प्राप्ति होती है। दक्षिण भाग से द्वितीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो चारण (नट-नर्तक) के साथ संयोग तथा शुभ कार्य और धर्मादि की प्राप्ति को
सूचित करता है।
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