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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 44
अपरे तु कर्मिणां भयमथ कोणे चानिले खरोष्ट्रवधः। अत्रैव मनुष्याणां विसूचिकाविषभयं भवति ॥
पश्चिम भाग-स्थित अर में दीप्त शकुन हो तो कारीगरों को भय, वायव्य कोण-स्थित अर में दीप्त शकुन हो तो गदहे और ऊँटों का नाश तथा मनुष्यों को विसूचिका रोग और विष का भय होता है।
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