आग्नेय कोणस्थित अर में दीप्त शकुन हो तो शरत्र और अग्नि का प्रकोप, घाड़ का नारा तथा शिल्पियों से भय होता है। दक्षिण-स्थित अर में दोप्त शकुन हो तो धर्म का नाश तथा नैऋत्य कोण-स्थित अर में दीप्त शकुन हो तो अग्नि, ऊपर गमन या दुष्ट के द्वारा मरण होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।